Sunday, 2 August 2026
मित्र नहीं हैं!
Sunday, 10 May 2026
ऐ माँ मुझको फिर से जन दे !
ऐ माँ मुझको फिर से जन दे !
जीवन हो शुरू फिर बचपन से
ऐ माँ मुझको फिर से जन दे !
इस बार जो मिटटी तन भर जाय,
धोना ना, रहने ही देना
मेरी तोतली बोलों पे, नहीं बताना सही गलत
मुस्का देना, कहने ही देना
उम्र गई फिर कहाँ मिलेंगे
घुटन्ईयों के दिन हैं दो दिन
घाव सजा लूं घुटनन पे !
ऐ माँ मुझको फिर से जन दे !
तेरी गोद में उलट पलट
तब तक कर लूं , जब संकोच धरूं
मुहं नोच लूं, बाल बिखेरूं
मन माना खेल किलोल करूँ
एक बार जो छूटे
फिर कब मिलते हैं,
ये संगी साथी छुटपन के !
ऐ माँ मुझको फिर से जन दे !
है याद मुझे मैं कहता था
जब खूब बड़ा हो जाउंगा,
मेरी मां, मेरी प्यारी माँ
तुझसे ही ब्याह रचाउंगा
मुझे कन्हैया ले के चल
तुझको कुछ दिखलाता हूँ,
एक निशां बना के आया हूँ
अभी जीभ से दर्पन पे !
ऐ माँ मुझको फिर से जन दे !
खा ले बेटा, फिर बढेगा कैसे
इस बार नहीं बढ़ना मुझको
इस बार नहीं, एक ग्रास भी लूँगा
खूब भगाऊँगा तुझको
तेरी गोद से बहुत बड़ा
दूर खड़ा कर देंगे ये
ऐ माँ अबकी रहने ही दे
दो चार निवाले बचपन के !
ऐ माँ मुझको फिर से जन दे !
आप-धापी उहा -पोह
लेन-देन तेरा-मेरा
मथे डालता है माँ मुझको
निर्मम जीवन का फेरा
मैं गोद गोद खेला था मां
अब गेंद सा खेला जाता हूँ
कुछ भी कर माँ एक बार मुझे
एक छत्र मेरा वो शासन दे !
ऐ माँ मुझको फिर से जन दे !
जीवन हो शुरू फिर बचपन से
ऐ माँ मुझको फिर से जन दे !
Friday, 16 January 2026
बात खींचती रही
Thursday, 21 November 2024
दर्द
महसूस ही किया होगा
देखा तो ना होगा |
पानी तो देखा होगा
गिलास में रक्खा
ठहरा हुआ, पारदर्शी
इसे छू कर देखो
ऐसा ही होता है दर्द
चुपचाप
कोई छू दे बस
घण्टों बनी रहती है हलचल
कुछ देर दिखती है
फिर नंगी आँखों से नहीं दिखती
पर चुभती बहुत देर है |
Monday, 29 July 2024
आई तुम्हारी याद!
Friday, 19 July 2024
किसी दिन पूछ लूंगा!
Friday, 15 September 2023
मुझको तुम सब याद रहोगे
तुम लिख देना...
Tuesday, 23 May 2023
चेहरा झूठ नहीं बोलता
Monday, 25 May 2015
आसान नहीं है तारा होना
खुद ही में जलना
लावे सा पिघलना
निरंतर |
अलग कर लेना खुद को,
अवस्थित कर लेना
दूर कहीं अन्तरिक्ष में
सबसे अलग
आकाश गंगा में
ध्रुव हो जाना |
भभकती ये ज्वाला
दूर ........बहुत दूर से
टिमटिमाती सी दिखाई देती है
और नितांत पीड़ा सहता सूर्य
तारा सा दिखता है
शांत शीतल टिमटिमाता हुआ
बहुत घने अंधेरों में ……. बहुत चमकदार |
आसान नहीं है तारा होना...
- नवीन
(... यूँ ही कुछ सोचता हूँ मैं)