दर्द देखा है कभी?
महसूस ही किया होगा
देखा तो ना होगा |
पानी तो देखा होगा
गिलास में रक्खा
ठहरा हुआ, पारदर्शी
जैसे कुछ है ही नहीं |
इसे छू कर देखो
ऐसा ही होता है दर्द
चुपचाप
कोई छू दे बस
घण्टों बनी रहती है हलचल
कुछ देर दिखती है
फिर नंगी आँखों से नहीं दिखती
पर चुभती बहुत देर है |