Sunday, 15 April 2012

अजनबी शहर

कोई जाना पहचाना ढूंढती आँखें 
कोई परिचित आवाज सुनने का प्रयास 
सब व्यर्थ

एक अपार भीड़ में
कुछ मिलता जुलता सा 
बिलकुल उसके जैसा 
हाँ - वही तो 
मगर 
मगर नहीं
वो नहीं 

एक दिवास्वप्न 
निरर्थक 

कुछ  है तो बस 
लंबी सडकें 
अंतहीन सडकें 
एक  शिथिल  पथिक 
और अजनबी शहर |
(10.10.99)

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