कोई जाना पहचाना ढूंढती आँखें
कोई परिचित आवाज सुनने का प्रयास
सब व्यर्थ
एक अपार भीड़ में
कुछ मिलता जुलता सा
बिलकुल उसके जैसा
हाँ - वही तो
मगर
मगर नहीं
वो नहीं
एक दिवास्वप्न
निरर्थक
कुछ है तो बस
लंबी सडकें
अंतहीन सडकें
एक शिथिल पथिक
और अजनबी शहर |
(10.10.99)
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