Sunday, 10 May 2026

ऐ माँ मुझको फिर से जन दे !

ऐ माँ मुझको फिर से जन दे !

जीवन हो शुरू फिर बचपन से

ऐ माँ मुझको फिर से जन दे !


इस बार जो मिटटी तन भर जाय, 

धोना ना, रहने ही देना

मेरी तोतली बोलों पे, नहीं बताना सही गलत

मुस्का देना, कहने ही देना 


उम्र गई फिर कहाँ मिलेंगे

घुटन्ईयों के दिन हैं दो दिन

घाव सजा लूं घुटनन पे !


ऐ माँ मुझको फिर से जन दे !


तेरी गोद में उलट पलट

तब तक कर लूं , जब संकोच धरूं

मुहं नोच लूं, बाल बिखेरूं

मन माना खेल किलोल करूँ


एक बार जो छूटे

फिर कब मिलते हैं,

ये संगी साथी छुटपन के !


ऐ माँ मुझको फिर से जन दे !


है याद मुझे मैं कहता था

जब खूब बड़ा हो जाउंगा,

मेरी मां, मेरी प्यारी माँ 

तुझसे ही ब्याह रचाउंगा


मुझे कन्हैया ले के चल

तुझको कुछ दिखलाता हूँ,

एक निशां बना के आया हूँ

अभी जीभ से दर्पन पे !


ऐ माँ मुझको फिर से जन दे !


खा ले बेटा, फिर बढेगा कैसे

इस बार नहीं बढ़ना मुझको

इस बार नहीं, एक ग्रास भी लूँगा

खूब भगाऊँगा तुझको


तेरी गोद से बहुत बड़ा

दूर खड़ा कर देंगे ये

ऐ माँ अबकी रहने ही दे

दो चार निवाले बचपन के !


ऐ माँ मुझको फिर से जन दे !


आप-धापी उहा -पोह

लेन-देन तेरा-मेरा

मथे डालता है माँ मुझको

निर्मम जीवन का फेरा 


मैं गोद गोद खेला था मां

अब गेंद सा खेला जाता हूँ

कुछ भी कर माँ एक बार मुझे

एक छत्र मेरा वो शासन दे !


ऐ माँ मुझको फिर से जन दे !


जीवन हो शुरू फिर बचपन से

ऐ माँ मुझको फिर से जन दे !