Sunday, 2 August 2026

मित्र नहीं हैं!

बिसर चुके हैं हंसी ठहाके
गाँव छूटा मित्र वहीं हैं

दुनियादारी तेरी मेरी
यही रह गई मित्र नहीं हैं

धीरे से धुंधलाते चेहरे
बढ़ती उम्र है जिक्र नहीं है

याद पुरानी साथ पुराने
हम कहीं हैं मित्र कहीं हैं!


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